आगरा। वरिष्ठ अधिवक्ता की पुलिस दबिश के दौरान हुई मौत से खलबली मची हुई है। रात में पोस्टमार्टम गृह पर पहुंचे अधिवक्ताओं ने भी पुलिस पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने अधिवक्ता को ऊपर से धक्का दिया है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए प्रयास किया लेकिन मृतक के भाई ने फोन पर पुलिस अधिकारियों से साफ बोल दिया जब तक मैं नहीं आऊंगा पोस्टमार्टम नहीं होगा। उनके दोनों भाइयों का इंतजार हो रहा है। इधर दीवानी और शास्त्रीपुरम में बवाल होने की आशंका को देखते हुए मंगलम आधार अपार्टमेंट में भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।
अधिवक्ता सुनील शर्मा अपनी पत्नी के साथ मंगलम आधार अपार्टमेंट में फ्लैट नंबर 801 में रह रहे थे। देर रात पुलिस की एक गाड़ी अपार्टमेंट में आई।

गाड़ी में एक महिला पुलिस कर्मी और तीन दरोगा सवार थे। पुलिस कर्मी ऊपर गए। पुलिस को अधिवक्ता सुनील शर्मा की तलाश थी। कुछ देर बाद अचानक तेज आवाज हुई। लोगों ने निकल कर देखा तो अधिवक्ता जमीन पर पड़े थे। आनन-फानन में पुलिस कर्मी गाड़ी में बैठकर भागने लगे। लोगों ने उन्हें रोक लिया। पुलिसकर्मी उसी गाड़ी से लहूलुहान हालत में पड़े अधिवक्ता सुनील शर्मा को हॉस्पिटल लेकर गए जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों के पसीने छूट गए। उन्होंने अधिकारियों को सूचना दी। सूचना पर सुनील शर्मा की पत्नी भी पोस्टमार्टम गृह पहुंच गईं। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने का प्रयास किया तो फोन पर मृतक सुशील शर्मा के कर्नल भाई ने कहा जब तक मैं नहीं आ जाऊंगा पोस्टमार्टम नहीं होगा। दूसरे भाई पुणे में रहते हैं उन्हें भी सूचना दे दी गई थी।
मृतक की पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल पुलिस पर लगा रहीं आरोप

सुशील शर्मा की पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल है। उनकी पत्नी का कहना है कि उनके पति की मौत के जिम्मेदार पुलिसकर्मी हैं। वह जबरन फ्लैट में घुस आए और तलाशी लेने लगे। उन्होंने अभद्रता भी की। पूरी रात वह बिलख बिलख कर रोती रहीं और पुलिस को कोसती रहीं।
देर रात पहुंचे कई अधिवक्ता पुलिस का जवाब सुनकर हुए नाराज
देर रात कई अधिवक्ता पोस्टमार्टम गृह पहुंचे। जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से पूछा अधिवक्ता की मौत कैसे हुई? तो पुलिस अधिकारी बोले अधिवक्ता पुलिस को देखकर छिप गए थे और अचानक गिर गए। इस पर अधिवक्ता बोले भला अधिवक्ता पुलिस से क्यों डरेगा। पुलिस ने ही उन्हें धक्का देकर नीचे गिराया है। वह पुलिस कर्मियों का जवाब सुनकर काफी नाराज थे।
रात में दबिश देने का क्या औचित्य था
आखिर देर रात पुलिस का दबिश देने का क्या औचित्य था। यह सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर पुलिस को अधिवक्ता की गिरफ्तारी करनी थी तो वह दिन में भी कर सकती थी। लोगों का कहना है कि पुलिस की वजह से ही अधिवक्ता की मौत हुई है।
अधिवक्ता सोशल मीडिया पर भी जता रहे विरोध

अधिवक्ताओं के द्वारा सोशल मीडिया पर भी विरोध जताया जा रहा है। एडवोकेट गिरीश कटारा ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर लिखा है कि मुकदमा वादी और पुलिस के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। क्योंकि बैनामा रजिस्टर्ड रजिस्ट्रार करता है। पुलिस ने अधिवक्ता के विरुद्ध झूठा मुकदमा पंजीकृत किया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता सरोज यादव ने लिखा है कि बहुत ही निंदनीय घटना है। कड़ी शब्दों में भर्त्सना करती हूं और मांग करती हूं कि वकील भाई सुनील शर्मा जी के साथ हुई घटना की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और दोषी पुलिस वालों के खिलाफ हत्या का मुकदमा कर उन्हें जेल भेजा जाए। सभी अधिवक्ता बहनों भाइयों को वकीलों की हत्या, जानलेवा हमले और पुलिसिया उत्पीड़न के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन करने की सख्त जरूरत है।











