आगरा। जगदीशपुरा थाना क्षेत्र में करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जे के मामले में जांच सीबीसीआईडी के द्वारा की जा रही है। गुरुवार को एडीजी सीबीसीआईडी इसी मामले की जांच के संबंध में आगरा आए। वह विवादित भूखंड का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। वहां जेल में बंद रवि कुशवाह के परिवार की दो महिलाएं मिलीं। दोनों से सवाल-जवाब किए। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की विवेचना में पड़ताल में सीबीसीआईडी को झोल ही झोल मिले हैं। सीबीसीआईडी की जांच में थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार आरोपित बना तो गांजा और शराब बरामदगी की फर्द में शामिल टीम भी फंसेगी। दोनों फर्द में कई पुलिसकर्मी शामिल हैं।
बैनारा फैक्ट्री के पास 10 हजार वर्ग गज जमीन को कब्जाया गया था। आबकारी और नशीले पदार्थ के दो फर्जी मुकदमे दर्ज कर पांच लोग जेल भेजे गए थे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। सभी के जेल जाने के बाद जमीन पर रातों रात कब्जा हुआ था। बाउंड्रीवाल बनी थी। वहां सीसीटीवी लग गए थे। दो बंदूकधारी गार्ड तैनात हो गए थे। मामला डीजीपी तक पहुंचा तो जांच हुई। तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार, बिल्डर सहित 18 को नामजद कर मुकदमा दर्ज हुआ था। एसओ को पुलिस ने आपराधिक षड्यंत्र का आरोपित मानकर जेल भेजा था। एसआईटी की जांच में कथित मालकिन भी फर्जी निकली थी। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिसान बनाया गया था। पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में उमा देवी, धर्मेंद्र, रवि कुशवाह, शंकरिया, मोहित उर्फ किशन कुमार, राजू को जेल भेजा था। कई आरोपित जमानत पर बाहर हैं। मुकदमे की विवेचना के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। विवेचक ने एसआईटी के निर्देशन में बिल्डर, बेटे, पुरुषोत्तम पहलवान, भूपेंद्र पहलवान, किशोर बघेल, अमित अग्रवाल, नेम कुमार जैन को डकैती, कब्जे आदि की धारा का आरोपित बनाया था। वहीं तत्कालीन एसओ को आपराधिक साजिश का आरोपित बनाया था। उमा देवी, धर्मेंद्र, रवि कुशवाह, संकरिया, मोहित उर्फ किशन कुमार, राजू को धोखाधड़ी की धाराओं का आरोपित बनाया था। कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया था।
इधर शासन के निर्देश पर जमीन कांड की विवेचना सीबीसीआईडी आगरा सेक्टर को मिली है। इंस्पेक्टर अनिल प्रताप विवेचक हैं। एडीजी सीबीसीआईडी एंटनी देव कुमार ने गुरुवार को पहले आगरा और मेरठ सेक्टर के बैठक ली। लंबित विवेचनाओं की जानकारी ली। उनके निस्तारण के लिए निर्देशित किया। सूत्रों की मानें तो बैठक के बाद सर्वाधिक चर्चा जगदीशपुरा कांड पर हुई। एडीजी टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। विवेचक को निर्देश दिए कि वह इस बात की जानकारी करें कि कब क्या हुआ? किसने क्या किया? किस पर क्या आरोप हैं? कौन-कौन बच गया? किसका खेल था? पुख्ता साक्ष्य संकलन किया जाए। शराब और गांजा कहां से आया? यह भी पता लगाया जाए। सीबीसीआईडी सूत्रों की मानें तो इस विवेचना में तत्कालीन एसओ को आरोपित बनाया गया तो गांजा और शराब बरामदगी की फर्द में शामिल टीमें भी फसेंगी। फर्जी बताए जाने वाले दोनों गुडवर्क की फर्द में एसओ शामिल नहीं था। पुलिस ने उसे आपराधिक साजिश का आरोपित बना दिया। पुलिस ने चार्जशीट लगा दी। पुलिस और आबकारी टीम के बारे में विवेचना में जिक्र तक नहीं किया। इससे इतना तो साफ है पुलिस ने जगदीशपुरा कांड की विवेचना में अपनों को बचाने का प्रयास किया।











