आगरा। राष्ट्र संत आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के अविस्मरणीय आध्यात्मिक जीवन, तप, त्याग और राष्ट्र-निर्माण में उनके असाधारण योगदान को सम्मान देते हुए उत्तर प्रदेश राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भावपूर्ण एवं विस्तृत पत्र भेजकर आचार्यश्री को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किए जाने की मांग उठाई है।
सांसद जैन द्वारा लिखे गए पत्र में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के व्यक्तित्व, कृतित्व और समाज सेवा को विस्तार से रेखांकित किया गया है। सांसद जैन ने लिखा कि आचार्यश्री ने 22 वर्ष की अल्पायु में दिगंबर दीक्षा ग्रहण कर स्वयं को पूरी तरह राष्ट्र, धर्म और मानव कल्याण के कार्यों में समर्पित कर दिया। कठोर तप, त्याग, संयम, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य जैसे सिद्धांतों का पालन करते हुए उन्होंने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया।
“समाज ने उन्हें सदैव वंदनीय माना” — सांसद जैन
सांसद नवीन जैन ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी न केवल जैन समाज, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय समाज के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत रहे हैं। आजीवन उन्होंने कठिन तप, वर्षों की पैदल यात्राएँ, अद्वितीय अनुशासन और भौतिक संसाधनों से दूरी बनाकर साधना की। इन सभी कारणों से वे समस्त समाज द्वारा वंदनीय माने गए।
50 से अधिक ग्रंथों की रचना, शिक्षा–सेवा–चरित्र निर्माण में अद्भुत योगदान
अपने पत्र में सांसद जैन ने उल्लेख किया कि आचार्यश्री ने संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, मराठी व कन्नड़ सहित विविध भाषाओं में 50 से अधिक ग्रंथों की रचना की। उनकी ‘मूकमाटी’ जैसी प्रसिद्ध कृति सहित अनेक अन्य रचनाएँ अध्यात्म और मानवीय मूल्यों की अनमोल धरोहर हैं।
वे शिक्षा, स्वास्थ्य, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण तथा चरित्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में समाज का निरंतर मार्गदर्शन करते रहे। उनकी प्रेरणा से देशभर में सैकड़ों विद्यालय, महाविद्यालय, छात्रावास, चिकित्सालय एवं अन्य सेवा संस्थान स्थापित हुए। इसी के साथ उनके साहित्य और जीवन पर 100 से अधिक पीएचडी शोध कार्य पूरे हो चुके हैं, जो उनके प्रभाव और अध्यात्मिक विरासत को प्रमाणित करते हैं।
अंतिम समय में भी तप–उपवास जारी रखा
सांसद जैन ने अपने पत्र में लिखा कि 18 फरवरी 2024 को आचार्यश्री ने तीन दिनों के दीर्घ उपवास और पूर्ण मौन के उपरांत शांत चित्त से देह त्याग किया, जो उनकी अपरिमित तपशक्ति और अध्यात्म की सर्वोच्च स्थिति का परिचायक है।
“भारत रत्न ही उनकी सेवाओं का सर्वोच्च सम्मान” — सांसद
सांसद जैन ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज जैसी अद्वितीय विभूति को राष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक सम्मान — भारत रत्न — प्रदान किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे न केवल देश बल्कि संपूर्ण विश्व में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और तप संस्कृति को गौरव प्राप्त होगा।
500 से अधिक मुनियों व 1000 से अधिक आर्यिकाओं को दीक्षा — आध्यात्मिक महायज्ञ
आचार्य श्री ने अपने अतुलनीय तप, अनुशासन और त्याग की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए 500 से अधिक मुनियों तथा 1000 से अधिक आर्यिकाओं को दीक्षा प्रदान कर आध्यात्मिक चेतना का नया आयाम स्थापित किया। यह दिव्य आयोजन पूरे जैन समाज के लिए गर्व का क्षण बना।
प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्रशंसा का उल्लेख
वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं आचार्यश्री के चरणों में नमन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। देह त्याग के अवसर पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की अपूर्णीय क्षति का उल्लेख करते हुए कहा था कि आचार्यश्री का तप, त्याग और सेवा-कार्य विश्वभर में भारतीय अध्यात्म का ध्वज ऊँचा करते हैं। यह तथ्य यह भी दर्शाता है कि राष्ट्रसंतों और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति प्रधानमंत्री की श्रद्धा कितनी गहरी है।











